कविता Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps May 19, 2020 गंध बाँटते फूलों को काँटो में पलते देखा है ।अपना अस्तित्व मिटा मेहंदी को रंग छिड़कते देखा है ।कागज़ की नावों से दरिया पार कराने वालों , हमनेछले गए विश्वासों को इतिहास बदलते देखा है ।। - चिंतन जैन Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
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